अगर यही जीना है तो जीना क्या hai !!!!!!!
दुनिया बड़ी अजीब सी दास्तान है , जमीन सबकी अलग अलग पर सर के ऊपर एक ही आसमान है , यहाँ किसी को दिल से मिलने कि फुर्सत ही नहीं है , दिल को लोग आज कल क्रेडिट कार्ड में बंद करके घुमते हैं , रिश्तो कि गहरे को समझे इतनी फुर्सत अब कहा है , कभी रास्ते में किसी पुराने दोस्त को देख कर मुस्कराहट आ ही जाती है , पर दिन भर कि भाग दौड़ में उन पुराणी यादो को सोचने कि फुर्सत अब कहा है , साइकिल से स्कूटर , स्कूटर से बीके और बीके से कार तक के सफ़र में जिन्दगी गुजर गयी , मंजिल पाने की होड़ में , आगे निकलने कि होड़ में , न जाने कितनी बार रास्तो कि ख़ूबसूरती को इग्नोर किया , मंजिल तो पा ली अब लेकीन वापस लौट के फिर से खूबसूरत लम्हों को जीने कि फुर्सत कहा है . सुबह सुबह रोज बच्चे के जागने से पहले ही रोज निकल गए ऑफिस , और जब आये तब उसको सोता पाया , चादर के अंदर ही वो कब 5 से 15 का हो गया पता ही नहीं चला , अब सोचते हो कि उसके बचपन कि तस्वीर कहा है . क्या दिन थे वो जब स्कूल में prayer के वक़्त बनी लाइन में लगते थे दोस्तों के साथ , आज ट्राफ्फिक सिग्नल पे रेड लाइट पे अनजाने चेहरों के साथ खड़े हो , दिल में हज़ार सवाल , दिमाग में हज़ार टेंशन , अपने लिए कोई वक़्त ही नहीं , माँ के हाथ की रोटियों कि जगह कब पिज्जा ने ले ली पता ही नहीं चला , जिंदगी को जीने निकले थे , अगर यही जीना है दोस्तों तो जीना क्या है ?

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