Search This Blog

Loading...

Monday 9 January 2012

तन्हाई


जब जब तुम तनहा थे,

तब तब हम दोस्त थे,

जब जब तुम परेशां थे,

तब तब हम दोस्त थे,

अब जब मैं हूँ परेशां,

तो तनहा भी मैं ही क्यों,

शायद हिसाब में मैं अब भी कच्चा हूँ

0 comments:

Post a Comment